
देश के जाने-माने शिक्षाविद और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल (अनशन) पर हैं। गिरते स्वास्थ्य और सरकार की चुप्पी को लेकर अब सियासत पूरी तरह गरमा गई है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए बेहद कड़े सवाल खड़े किए हैं।
सोमवार को मुंबई में मीडिया से बात करते हुए राउत ने कहा, “यह बेहद अफ़सोस की बात है कि 16 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बात करने नहीं पहुंचा। क्या सरकार सोनम वांगचुक को मरने के लिए छोड़ देना चाहती है?”
आखिर क्यों अनशन पर बैठे हैं पद्मश्री सोनम वांगचुक?
संजय राउत के अनुसार, वांगचुक का यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य और मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की कमियों के खिलाफ है।
नीट (NEET) घोटाला और छात्रों का दर्द: देश में हाल ही में हुए नीट पेपर लीक और शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार ने लाखों छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। कई होनहारों की आत्महत्याओं ने देश को झकझोर कर रख दिया, जिसके खिलाफ वांगचुक आवाज उठा रहे हैं।
भ्रष्टाचार पर जवाबदेही की मांग: शिक्षा मंत्रालय के कामकाज और परीक्षाओं की शुचिता पर उठ रहे गंभीर सवालों को लेकर वे लगातार डटे हुए हैं।
सेहत पर भारी पड़ रहा आंदोलन: भूख हड़ताल के चलते सोनम वांगचुक का वजन 7.5 किलो तक घट गया है और उनका ब्लड प्रेशर भी लगातार कम हो रहा है। इसके बावजूद, बारिश और मुश्किल हालातों के बीच वे जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं।
“सोनम वांगचुक कोई साधारण व्यक्ति नहीं”
सरकार को उनके योगदान की याद दिलाते हुए संजय राउत ने कहा कि सोनम वांगचुक एक असाधारण और सम्मानित व्यक्तित्व हैं। वे पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में देश का गौरव हैं। ऐसे निस्वार्थ व्यक्ति की मांगों को अनसुना करना पूरे समाज का अपमान है।
अन्ना हजारे से समर्थन की भावुक अपील
संजय राउत ने इस दौरान वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के ऐतिहासिक आंदोलनों का भी जिक्र किया।
“जब अन्ना हजारे अनशन पर बैठते थे, तो तत्कालीन सरकारें संवाद के लिए दौड़ती थीं। आज अन्ना जी को भी आगे आना चाहिए, दिल्ली आकर सोनम वांगचुक से मिलना चाहिए और उनके इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को अपना समर्थन देना चाहिए।”



